भारत और न्यूजीलैंड के बीच वडोदरा में जब विराट कोहली और शुभमन गिल साथ बल्लेबाज़ी कर रहे थे, तब कॉमेंट्री बॉक्स में एक सवाल उठा — कोहली से अगली पीढ़ी को क्या सीखना चाहिए? जवाब सिर्फ बल्लेबाज़ी से जुड़ा नहीं था, बल्कि जीवनशैली और सोच से था।
शास्त्री का संदेश
रवि शास्त्री ने बताया कि कोहली की सबसे बड़ी ताकत उनकी आदतें हैं — सुबह-सुबह की कैच प्रैक्टिस, फील्डिंग ड्रिल्स, थ्रो ट्रेनिंग और फिटनेस रूटीन। ये सब मैदान के बाहर की मेहनत है जो टीवी पर नहीं दिखती, लेकिन असली ‘ग्रेटनेस’ वहीं से बनती है।
सिर्फ टैलेंट नहीं चलता
कोहली की सफलता कवर ड्राइव से नहीं, बल्कि प्रोफेशनलिज्म के सिस्टम से बनी है। हर दिन एक जैसा अनुशासन, हर अभ्यास में वही ऊर्जा, और हर छोटे काम को बड़े लक्ष्य की तरह लेना — यही उनका असली फॉर्मूला है।
गिल के लिए सबक
शुभमन गिल में काबिलियत की कोई कमी नहीं है। वो टीम इंडिया के कप्तान भी हैं और भविष्य के सितारे भी। लेकिन ODI क्रिकेट में सफलता बनाए रखने के लिए सिर्फ स्किल नहीं, बल्कि कोहली जैसा डेडिकेशन ज़रूरी है।
शास्त्री ने साफ कहा — अगर गिल को लंबा और स्थायी करियर चाहिए, तो उन्हें कोहली का प्रोसेस अपनाना होगा।
कोहली की लंबी रेस
विराट कोहली ने यह साबित किया है कि स्थायित्व केवल टैलेंट से नहीं आता, बल्कि यह हर दिन खुद से किए गए कमिटमेंट और बिना समझौते वाली मेहनत से आता है। उनकी फिटनेस, तैयारी और मानसिकता ने उन्हें एक उदाहरण बना दिया है।
एक प्रतीकात्मक साझेदारी
वडोदरा में कोहली और गिल की साझेदारी सिर्फ रन बनाने की साझेदारी नहीं थी, बल्कि यह ‘बैटन पासिंग’ जैसा था। यह उस क्षण का संकेत था जहां एक पीढ़ी दूसरी से सीखने को तैयार है।
हर दिन पसीना, एक जैसी तैयारी और कभी भी प्रोसेस से समझौता ना करना — यही कोहली की खासियत है। यही बात अगली पीढ़ी को अपनानी होगी, ताकि भारत को लंबे समय तक ऐसे ही मैच विनर मिलते रहें।
FAQs
रवि शास्त्री ने कोहली की कौन सी आदत को सराहा?
उनकी डेली रूटीन, मेहनत और प्रोफेशनल रवैये को।
गिल को कोहली से क्या सीखना चाहिए?
वर्क एथिक, रूटीन और मैदान के बाहर की तैयारी।
क्या सिर्फ टैलेंट काफी है ODI में?
नहीं, फिटनेस और निरंतरता ज़रूरी है।
कोहली की सफलता का असली राज क्या है?
हर दिन एक जैसी तैयारी और आत्म-अनुशासन।
कोहली और गिल की साझेदारी कब हुई?
पहले वनडे में वडोदरा में न्यूजीलैंड के खिलाफ।








