बास डी लीड़े – विरासत से आगे बढ़ता डच क्रिकेट का नया सितारा

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Bas de Leede

खेल की दुनिया में परिवार का नाम कभी ताकत बनता है, तो कभी दबाव। लेकिन बास डी लीड़े के लिए यह नाम एक बोझ नहीं, बल्कि प्रेरणा की तरह है। वह उस विरासत को ढो नहीं रहे, बल्कि उसे नए अंदाज़ में आगे बढ़ा रहे हैं।

आज जब नीदरलैंड्स की टीम बड़े मंच पर उतरती है, तो बास सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि डच क्रिकेट की नई पहचान बनकर सामने आते हैं।

विरासत

Bas de Leede ऐसे परिवार से आते हैं जहां क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, परंपरा है। उनके पिता Tim de Leede उस दौर के खिलाड़ी रहे जब नीदरलैंड्स का वर्ल्ड कप खेलना ही बड़ी बात मानी जाती थी।

टिम ने 29 वनडे खेले, टीम की कप्तानी की और इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में नॉर्थहैम्पटनशायर, ससेक्स और सरे के लिए खेलकर डच क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। 2003 वर्ल्ड कप में पार्ल में सचिन तेंदुलकर का विकेट लेना आज भी उनकी बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

निरंतरता

हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप में नामीबिया के खिलाफ बास की नाबाद 72 रन की पारी और दो विकेट ने मैच का रुख बदल दिया। यह प्रदर्शन किसी तुलना की कोशिश नहीं लगा, बल्कि एक नई कहानी की अगली कड़ी जैसा महसूस हुआ।

उनकी बैटिंग में आत्मविश्वास और गेंदबाज़ी में संतुलन साफ नजर आता है। वह सिर्फ नाम के सहारे नहीं, अपने प्रदर्शन के दम पर जगह बना रहे हैं।

सीख

बास अक्सर बताते हैं कि उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत घर के लिविंग रूम में पिता के साथ की थी। यह खेल उन पर थोपा नहीं गया, बल्कि स्वाभाविक रूप से उनकी जिंदगी का हिस्सा बना।

टिम ने कभी अपने अनुभव का बोझ बेटे पर नहीं डाला। वह सलाह देते हैं, लेकिन दखल नहीं देते। यही भरोसा बास को अपनी शैली में खेलने की आज़ादी देता है।

परिवार

डी लीड़े परिवार की कहानी सिर्फ बास तक सीमित नहीं है। उनके छोटे भाई टॉम अंडर-19 सेटअप का हिस्सा रहे हैं। उनकी चचेरी बहन Babette de Leede महिला राष्ट्रीय टीम की अहम खिलाड़ी हैं और कई अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं।

दादा फ्रांस डी लीड़े क्लब क्रिकेटर और बाद में अंतरराष्ट्रीय अंपायर रहे। यानी यह परिवार डच क्रिकेट की कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है।

तुलना

विश्व क्रिकेट में पिता-पुत्र की जोड़ियाँ कम ही देखने को मिलती हैं। डॉन और डेरेक प्रिंगल, लांस और क्रिस केर्न्स, क्रिस और स्टुअर्ट ब्रॉड, ज्यॉफ, मिचेल और शॉन मार्श, रॉड और टॉम लैथम, केविन और सैम करन जैसे नाम इस सूची में आते हैं।

अब डी लीड़े परिवार भी उसी कड़ी का हिस्सा बन चुका है, जहां विरासत सहजता से आगे बढ़ती है।

बदलाव

आज डच क्रिकेट सिर्फ भाग लेने वाली टीम की छवि से आगे निकल चुका है। टीम मुकाबला करने के इरादे से मैदान में उतरती है। बास की ऑलराउंड क्षमता टीम को संतुलन देती है, चाहे बल्ले से स्थिरता हो या गेंद से ब्रेकथ्रू।

टिम आज कोचिंग और कंसल्टिंग में सक्रिय हैं और महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। वहीं बास मैदान पर यह भरोसा बना रहे हैं कि नीदरलैंड्स किसी भी बड़ी टीम को चुनौती दे सकता है।

पहचान

बड़े नाम की छाया में खेलना आसान नहीं होता। लेकिन बास ने उस छाया को दबाव नहीं बनने दिया। उन्होंने विरासत को स्वीकार किया और अपनी अलग पहचान बनाई।

क्रिकेट में नाम शुरुआत दे सकता है, लेकिन पहचान प्रदर्शन से बनती है। बास डी लीड़े यह साबित कर रहे हैं कि डच क्रिकेट का भविष्य सिर्फ अतीत की यादों पर नहीं, बल्कि नई सोच और नए आत्मविश्वास पर टिका है।

FAQs

बास डी लीड़े ने कितने रन बनाए?

उन्होंने 72* रन बनाए।

टिम डी लीड़े का प्रसिद्ध विकेट?

2003 में सचिन तेंदुलकर।

बास किस भूमिका में खेलते हैं?

वे ऑलराउंडर हैं।

परिवार में और कौन खिलाड़ी है?

टॉम और बाबेट डी लीड़े।

टिम ने कितने वनडे खेले?

उन्होंने 29 वनडे खेले।

Ehtesham Aarif

Ehtesham Arif is a cricket content writer at SportsJagran.com with over 2 years of experience. He specializes in match previews, player analysis, and tournament coverage. His deep interest in the game reflects in his accurate and engaging reporting.

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