असोसिएट टीमों की पुकार फिर गूंजी, मौका मिलेगा तभी बनेगी असली टक्कर

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T20 World Cup

2016 टी20 वर्ल्ड कप में Peter Borren प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हो गए थे। उनका संदेश साफ था, हमें मौका दीजिए। उन्होंने याद दिलाया था कि 2009 में नीदरलैंड्स ने इंग्लैंड को हराया था और असोसिएट क्रिकेट को “गैर-व्यावसायिक” मानना गलत है।

2026 में हालात बदले जरूर हैं, लेकिन सवाल आज भी वही है।

नई चुनौती

इस टी20 वर्ल्ड कप में कई असोसिएट टीमों ने बड़ी टीमों को कड़ी टक्कर दी। Netherlands national cricket team ने पाकिस्तान को दबाव में डाल दिया। United States national cricket team ने भारत को मुश्किल में ला दिया। Nepal national cricket team और Scotland national cricket team ने आखिरी ओवर तक मुकाबला खींचा।

फर्क कम जरूर हुआ है, लेकिन नतीजे अभी भी अक्सर बड़ी टीमों के पक्ष में जाते हैं।

अनुभव कमी

यूएई के कोच Lalchand Rajput ने कहा कि ऐसे मैच खेले बिना सीखना संभव नहीं। नेट्स में दबाव की स्थिति नहीं बनती।

नामीबिया के कोच Craig Williams ने भी यही बात दोहराई कि ज्यादा मैच खेलेंगे तो ही सुधार होगा।

समस्या सीधी है। असोसिएट टीमों को फुल मेंबर देशों के खिलाफ नियमित मौके नहीं मिलते। कैलेंडर व्यस्त है और प्राथमिकता अक्सर शीर्ष टीमों को दी जाती है।

इतिहास चक्र

2024 में सुपर 8 तक पहुंचने के बाद USA को लंबे समय तक किसी फुल मेंबर के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिला। 2022 में दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद नीदरलैंड्स ने 479 दिन तक कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला।

हर वर्ल्ड कप में तारीफ होती है, फिर वही सन्नाटा।

संभावित मॉडल

नीदरलैंड्स के ऑलराउंडर Bas de Leede ने सुझाव दिया कि दो फुल मेंबर देशों के साथ ट्राई-नेशन सीरीज आयोजित की जा सकती है। यूरोप में इंग्लैंड, आयरलैंड, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स के बीच नियमित सीरीज संभव है।

ऐसे छोटे लेकिन प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट असोसिएट टीमों के लिए गेम चेंजर बन सकते हैं।

लीग असर

टी20 लीग्स ने भी बड़ा फर्क डाला है। ILT20, CPL और अन्य लीग में खेलने से खिलाड़ियों को बड़े सितारों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने का अनुभव मिलता है।

जब आप रशीद खान या पोलार्ड जैसे खिलाड़ियों के साथ खेलते हैं, तो आत्मविश्वास अपने आप बढ़ता है। यही कारण है कि असोसिएट टीमों का स्तर पहले से बेहतर दिख रहा है।

कोचिंग मजबूती

आज कई असोसिएट टीमों के साथ अनुभवी कोच जुड़े हैं। Stuart Law नेपाल के साथ काम कर चुके हैं। Gary Kirsten नामीबिया से जुड़े रहे।

बेहतर कोचिंग और लीग अनुभव ने अंतर घटाया है, लेकिन नियमित मुकाबलों के बिना यह प्रगति अधूरी है।

ICC जिम्मेदारी

International Cricket Council के सामने चुनौती आसान नहीं है। टीवी राइट्स, स्पॉन्सरशिप और व्यस्त कैलेंडर जैसे मुद्दे सामने हैं।

लेकिन अगर क्रिकेट को सच में वैश्विक बनाना है, तो अवसरों का संतुलन जरूरी है।

असोसिएट टीमें अब दया नहीं मांग रहीं, वे अवसर मांग रही हैं। उन्होंने मैदान पर साबित कर दिया है कि वे टक्कर दे सकती हैं।

अगर अगले चार साल फिर चुप्पी में बीत गए, तो 2030 में यही सवाल फिर उठेगा।

क्रिकेट को बड़ा बनाना है, तो दायरा भी बड़ा करना होगा। वरना हर वर्ल्ड कप में तालियां बजेंगी, वादे होंगे और फिर सब कुछ भूल जाएगा।

FAQs

असोसिएट टीम क्या होती है?

जो ICC की फुल मेंबर नहीं हैं।

मुख्य समस्या क्या है?

कम अंतरराष्ट्रीय मैच मिलना।

कौन सा समाधान सुझाया गया?

ट्राई-नेशन सीरीज और ज्यादा मौके।

लीग्स से क्या फायदा हुआ?

खिलाड़ियों को अनुभव मिला।

क्या फर्क कम हुआ है?

हाँ, लेकिन दबाव झेलने में कमी है।

Ehtesham Aarif

Ehtesham Arif is a cricket content writer at SportsJagran.com with over 2 years of experience. He specializes in match previews, player analysis, and tournament coverage. His deep interest in the game reflects in his accurate and engaging reporting.

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