गंभीर की टीम इंडिया – फैसलों की भूल और टेस्ट क्रिकेट में बढ़ता संकट

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Gambhir

गौतम गंभीर अक्सर कहते हैं, “हम एक टीम के तौर पर जीतते हैं, और एक टीम के तौर पर हारते हैं।” ये लाइन अब उनकी पहचान बन गई है। लेकिन शायद अब वक्त आ गया है कि एक बार उनकी ही जिम्मेदारी पर सीधा सवाल उठाया जाए—क्योंकि जब फैसले उनके हैं, तो जवाबदेही भी उनकी होनी चाहिए।

आंकड़ों की बात

गंभीर के कोच बनने के बाद भारत ने 18 टेस्ट खेले, जिनमें से सिर्फ 7 जीते और 9 हारे। सबसे बड़ा झटका ये है कि भारत को घर में ही 4 टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा है—जो पिछले तीन कोचों ने मिलकर 10 साल में नहीं गंवाए थे।

जो मैच जीते भी, वो बांग्लादेश और वेस्ट इंडीज़ जैसी टीमों के खिलाफ थे। जबकि साउथ अफ्रीका और न्यूज़ीलैंड से घरेलू जमीन पर 0-4 का रिकॉर्ड बना है।

परिवर्तन का दौर

ये सच है कि गंभीर ने एक ऐसे दौर में टीम संभाली जब सीनियर खिलाड़ी जैसे विराट कोहली, रोहित शर्मा और अश्विन ने संन्यास ले लिया। लेकिन इसके बावजूद टीम के पास बुमराह, सिराज, कुलदीप जैसे टॉप बॉलर्स और होनहार बल्लेबाज़ मौजूद हैं।

यानी समस्या सिर्फ रिजल्ट की नहीं, बल्कि फैसलों की है।

ऑलराउंडर मॉडल

गंभीर की सबसे चर्चित रणनीति है तीन ऑलराउंडर्स खिलाना। इससे बैटिंग तो गहराई तक जाती है, लेकिन एक फ्रंटलाइन बॉलर की कमी पड़ती है। खासकर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह फैसला भारत को भारी पड़ा।

एमसीजी, हेडिंग्ले और लॉर्ड्स जैसे मैच भारत के हाथ से फिसल गए, क्योंकि गेंदबाज़ थक चुके थे और विकेट लेने का दबाव उन्हीं पर था। बुमराह की पीठ की चोट और सिराज की थकावट इसी का नतीजा बनी।

पिच गेम

गंभीर की अगुवाई में भारत ने घरेलू मैदानों पर ज्यादा टर्न देने वाली पिचों का सहारा लिया। कोलकाता टेस्ट इसकी मिसाल है। उनका तर्क है कि इससे टॉस का असर कम होता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इससे दोनों टीमों के बीच का अंतर भी कम हो जाता है।

और जब पिच सब कुछ तय करने लगे, तो असली स्किल का क्या?

प्लेयर्स की गहराई

भारत के पास इतने अच्छे बॉलिंग ऑप्शन हैं कि उन्हें पिच के सहारे की ज़रूरत नहीं। फिर भी हर बार ‘माइनफील्ड’ बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? क्या गंभीर को अपने ही खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं है?

डर या रणनीति?

गंभीर ने कई मैचों में युवाओं को मौका दिया और कुछ यादगार जीतें भी मिलीं। लेकिन जब भी टीम प्रेशर में आई, रणनीति में डर झलकने लगा। ‘सेफ प्लान’ बनाए गए जो आखिरकार फेल हुए।

टीम इंडिया को अभी भी गाइडेंस की ज़रूरत है—ऐसी गाइडेंस जो साहसिक हो, जो खिलाड़ियों की क्षमता पर भरोसा करे, न कि हर बार पिच या फॉर्मूला प्लान पर टिके।

भविष्य का खतरा

अगर भारत अगला टेस्ट हारता है, तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल का रास्ता मुश्किल हो सकता है। और अगर ऐसा हुआ, तो गंभीर की कोचिंग पर उंगलियां उठना तय है।

FAQs

गंभीर का टेस्ट रिकॉर्ड कैसा है?

18 टेस्ट में 7 जीत और 9 हार।

गंभीर पर आलोचना क्यों हो रही है?

रणनीति और पिच चयन को लेकर लगातार सवाल।

ऑलराउंडर वाली रणनीति क्यों फेल हुई?

एक फ्रंटलाइन बॉलर की कमी से विकेट नहीं मिल रहे।

गंभीर की पिच नीति क्या है?

वो टर्निंग पिच को टॉस एडवांटेज कम करने का तरीका मानते हैं।

क्या गंभीर को पद से हटाया जा सकता है?

फिलहाल नहीं, पर टेस्ट सीरीज़ हारने पर दबाव बढ़ेगा।

Ehtesham Aarif

Ehtesham Arif is a cricket content writer at SportsJagran.com with over 2 years of experience. He specializes in match previews, player analysis, and tournament coverage. His deep interest in the game reflects in his accurate and engaging reporting.

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