कभी बंदूकें, कर्फ्यू और सन्नाटा — यही तस्वीर जम्मू-कश्मीर से जुड़ी थी। आज वही धरती रणजी ट्रॉफी चैंपियन के रूप में पहचानी जा रही है।
Ranji Trophy जीतना सिर्फ एक ट्रॉफी उठाना नहीं होता, यह राष्ट्रीय क्रिकेट की मुख्यधारा में अपनी जगह पक्की करना है।
ऐतिहासिक सफर
जम्मू-कश्मीर ने क्वार्टरफाइनल में मध्य प्रदेश, सेमीफाइनल में बंगाल और फाइनल में आठ बार की चैंपियन कर्नाटक को हराकर खिताब अपने नाम किया।
अंडरडॉग मानी जा रही टीम ने संयम, अनुशासन और कौशल से दिग्गजों को पीछे छोड़ा।
लंबा इंतजार
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना 1959-60 में हुई थी। पहली बड़ी सफलता 1982-83 में मिली, लेकिन इस शिखर तक पहुंचने में 67 साल लग गए।
दशकों तक राजनीतिक उथल-पुथल, 1989 का उग्रवाद, 2019 में विशेष दर्जा समाप्त होना और लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय मैचों की गैरमौजूदगी – इन सबने खेल ढांचे को प्रभावित किया।
लेकिन क्रिकेट का जुनून कभी खत्म नहीं हुआ।
तीन मोड़
इस सफलता की कहानी तीन अहम मोड़ों से गुज़री।
पहला दौर 2011-13 में Bishan Singh Bedi का रहा, जिन्होंने खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरा।
दूसरा मोड़ 2018-19 में Irfan Pathan के आगमन से आया। उनका संदेश साफ था — क्षेत्रीय विभाजन भूलो, एक टीम बनो। इसी दौर में अब्दुल समद और उमरान मलिक जैसे खिलाड़ी उभरे।
तीसरा बदलाव प्रशासनिक था। Mithun Manhas की अगुवाई में ढांचा पेशेवर बना और अजय शर्मा को कोच नियुक्त किया गया। आधुनिक फिटनेस, पोषण योजना और मानसिक प्रशिक्षण ने टीम को नई मजबूती दी।
नेतृत्व असर
41 वर्षीय Paras Dogra ने अनुभव से टीम को स्थिरता दी। तेज गेंदबाज Aaqib Nabi ने 60 विकेट लेकर सीजन के सितारे के रूप में पहचान बनाई।
अब्दुल समद की आक्रामक बल्लेबाज़ी ने टीम को कई अहम मौकों पर बढ़त दिलाई।
बदलाव प्रतीक
यह जीत उस बदलाव का प्रतीक है, जहां कभी संसाधनों की कमी थी, वहां अब आधुनिक ढांचा है। जहां अलगाव था, वहां अब राष्ट्रीय मंच पर पहचान है।
क्रिकेट अब भारत के हर कोने में जड़ें जमा चुका है और जम्मू-कश्मीर इसका जीवंत उदाहरण बन गया है।
रणजी ट्रॉफी की यह जीत सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि उम्मीद की वापसी है।
जम्मू-कश्मीर ने दिखा दिया कि संघर्ष चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, अगर दिशा और धैर्य हो तो इतिहास लिखा जा सकता है।
यह खिताब एक संदेश है – सपने सन्नाटे से भी जन्म ले सकते हैं और एक दिन शोर बनकर गूंजते हैं।
FAQs
जम्मू-कश्मीर ने कौन सी ट्रॉफी जीती?
रणजी ट्रॉफी।
फाइनल में किसे हराया?
कर्नाटक को।
आकिब नबी ने कितने विकेट लिए?
60 विकेट।
तीन प्रमुख मोड़ कौन से थे?
बेदी, पठान और मनहास का दौर।
इस जीत का महत्व क्या है?
राष्ट्रीय मुख्यधारा में मजबूत उपस्थिति।









