रमज़ान में एनर्जी ड्रिंक पीने पर मोहम्मद शमी की सफाई – क्या वह इस्लाम के अनुसार सही हैं?

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Mohammed Shami

5 मार्च को दुबई में खेले गए चैम्पियंस ट्रॉफी सेमीफाइनल के दौरान मोहम्मद शमी को एनर्जी ड्रिंक पीते देखा गया। उस वक्त रमज़ान चल रहा था, और कुछ लोगों ने इस पर सवाल उठाए कि क्या ये शरीयत के खिलाफ है।

शमी की सफाई

शमी ने इंटरव्यू में साफ कहा कि जब आप देश के लिए खेल रहे होते हैं, तो आपकी सेहत और परफॉर्मेंस को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस्लाम में ऐसी स्थिति में रोज़ा छोड़ने की छूट दी गई है और उन्होंने बाद में उस दिन का रोज़ा पूरा किया।

क्या इस्लाम इसकी इजाजत देता है?

हां, इस्लाम में सफर या कठिन शारीरिक स्थिति में रोज़ा छोड़ने की इजाजत है। शरीयत के मुताबिक, खिलाड़ी, मजदूर या बीमार लोग बाद में कज़ा रोज़ा रख सकते हैं या जरूरत पड़ने पर फिद्या दे सकते हैं। इसे ‘ज़रूरत की स्थिति’ यानी Darurah कहा जाता है।

धार्मिक आलोचना

ऑल इंडिया मुस्लिम जमाअत के अध्यक्ष मौलाना शाहाबुद्दीन रिज़वी ने शमी की आलोचना करते हुए कहा कि सार्वजनिक तौर पर ऐसा करना गलत है और शमी को अल्लाह के सामने जवाब देना होगा।

सोशल मीडिया पर बहस

कुछ यूज़र्स ने शमी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “धर्म पहले आता है।” लेकिन वहीं दूसरी ओर कई लोग उनके समर्थन में भी सामने आए।

जावेद अख्तर का समर्थन

जावेद अख्तर ने ट्वीट करते हुए शमी का समर्थन किया और कहा, “उन कट्टरपंथियों की बात मत सुनिए जिन्हें आपकी सेहत की कोई परवाह नहीं। आपने जो किया, वो आपकी समझदारी और ज़िम्मेदारी का हिस्सा है।”

इस्लाम में लचीलापन

कई मुस्लिम स्कॉलर्स ने कहा कि इस्लाम सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि लचीलापन और इंसानियत भी सिखाता है। जो लोग सिर्फ नियम की सतह को देखकर राय बना लेते हैं, वे अकसर गलत समझते हैं।

नतीजा क्या निकला?

मोहम्मद शमी ने जो किया, वो इस्लामी शरीयत के अनुसार सही है। एक खिलाड़ी के रूप में जब आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हों, तो धर्म भी आपको समझदारी और फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

सबक क्या है?

बिना पूरी जानकारी के किसी को जज करना आसान होता है, लेकिन ज़रूरी है कि हम इंसानियत और सोच को पहले रखें – यही सच्चा धर्म सिखाता है।

FAQs

क्या रमज़ान में रोज़ा तोड़ना जायज़ है?

ज़रूरी परिस्थितियों में इस्लाम में इसकी अनुमति है।

शमी ने रोज़ा छोड़ा तो क्या उन्होंने कज़ा की?

हां, उन्होंने बाद में रोज़ा पूरा किया।

क्या खेलते समय रोज़ा तोड़ा जा सकता है?

हां, अगर स्वास्थ्य पर असर हो तो रोज़ा छोड़ा जा सकता है।

क्या शमी ने इस्लाम के नियम तोड़े?

नहीं, उन्होंने शरीयत के अनुसार छूट का उपयोग किया।

रोज़ा न रखने पर इस्लाम क्या कहता है?

छूट हो तो कज़ा या फिद्या देना होता है।

Ehtesham Aarif

Ehtesham Arif is a cricket content writer at SportsJagran.com with over 2 years of experience. He specializes in match previews, player analysis, and tournament coverage. His deep interest in the game reflects in his accurate and engaging reporting.

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