गुवाहाटी टेस्ट के दूसरे दिन मैदान पर सबसे ज़्यादा सुनाई दी आवाज़ थी — ऋषभ पंत की। कप्तानी संभालने के बाद उन्होंने टीम को हर एंगल से मोटिवेट किया — चाहे टाइमर की याद हो, फील्ड सेटिंग या खिलाड़ियों को झकझोरना।
क्यों बने पंत कप्तान?
शुभमन गिल की चोट के चलते पंत को कप्तानी मिली। उनकी भूमिका सिर्फ फॉर्मल कप्तान की नहीं थी — वो टीम के कोच, चीयरलीडर और टाइम कीपर भी बन गए।
गुस्से में चेतावनी
पंत ने कुलदीप को ओवर रेट की चेतावनी दोहराई:
“यार कुलदीप, दोनों बार वार्निंग ले ली है।”
उनकी चिंता थी कि अगर स्लो ओवर रेट पर पेनल्टी हुई तो अंक कट सकते हैं।
फील्डिंग और दिशा
पंत खुद फील्डिंग सेट कर रहे थे:
“फील्ड मेरे को करने दे, तू टप्पे पे डालने को देख।”
उनका अंदाज़ सीधा, आक्रामक और प्रेरक था — गुस्से में लिपटी रणनीति।
मोटिवेशन भी जोशीला
खिलाड़ियों को बार-बार याद दिला रहे थे कि लड़ाई अभी बाकी है:
“भाई कल पूरी दिन मेहनत करी है यार, छोड़ेंगे नहीं, काम करते रहो।”
मैच का हाल
साउथ अफ्रीका की निचली क्रम ने भारत को परेशान किया। मुथुसामी (107*) और जानसेन (51*) की साझेदारी ने भारत की मुश्किलें बढ़ाईं। लंच से पहले एक विकेट मिला, लेकिन अभी तीन विकेट बाकी हैं।
स्कोर:
- साउथ अफ्रीका – 428/7 (137 ओवर)
- नॉट आउट: मुथुसामी 107*, जानसेन 51*
ऋषभ पंत का ये अंदाज़ सिर्फ शोर नहीं था, वह उस जज़्बे की गूंज थी जो एक कप्तान तब दिखाता है जब हालात हाथ से निकलते नज़र आते हैं। पंत की कप्तानी में भारत भले संघर्ष कर रहा हो, लेकिन लड़ाई में कोई कमी नहीं।
FAQs
पंत कप्तान क्यों बने?
शुभमन गिल चोटिल होने के कारण बाहर हुए।
पंत ने कुलदीप को क्या कहा?
दो बार ओवर रेट की चेतावनी मिलने की याद दिलाई।
साउथ अफ्रीका का स्कोर कितना था?
428/7 लंच तक।
मुथुसामी ने कितने रन बनाए?
मुथुसामी 107* रन पर नाबाद थे।
पंत ने फील्डिंग पर क्या कहा?
‘फील्ड मेरे को करने दे’ कहकर खुद प्लेसमेंट की।









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