आठ साल के सपने से वानखेड़े तक, संजय की शांत क्रांति की कहानी

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Satya Krishnamurthi

हर खिलाड़ी की शुरुआत किसी ट्रॉफी से नहीं होती। कभी-कभी वह सिर्फ एक दृश्य होता है, जो दिल में बस जाता है।

M. Chinnaswamy Stadium की सीढ़ियों पर बैठा आठ साल का एक बच्चा टेस्ट मैच देख रहा था। ट्रेंट बोल्ट ने सचिन तेंदुलकर को परेशान किया और फिर टिम साउदी ने उन्हें बोल्ड कर दिया। स्टैंड्स में सन्नाटा था, और उस बच्चे की आंखों में भी।

उसी बच्चे ने आगे चलकर Wankhede Stadium में हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल जैसे गेंदबाज़ों पर छक्के लगाए।

शुरुआत

संजय के पिता सत्य कृष्णमूर्ति क्रिकेट प्रेमी थे, लेकिन प्रोफेशनल करियर का सपना नहीं देखा था। 2011 विश्व कप जीत ने बेटे के मन में एक चिंगारी जलाई। परिवार बेंगलुरु शिफ्ट हुआ ताकि वह बेहतर ट्रेनिंग ले सके।

एबेनेज़र इंटरनेशनल स्कूल में कोच सैयद ज़बीउल्ला ने उसकी प्रतिभा पहचानी। उस समय संजय पावर-हिटर नहीं था। वह एंकर था, जो एक छोर संभालकर टीम को स्थिरता देता था।

मोड़

2020 की महामारी सब कुछ बदलकर ले आई। परिवार सैन फ्रांसिस्को के बे एरिया चला गया। भारत की गलियों से भरा क्रिकेट अचानक सीमित सुविधाओं में सिमट गया।

अमेरिका में रेड-बॉल क्रिकेट लगभग गायब था। टी20 ही असली मंच था। ऐसे में संजय को खुद को बदलना पड़ा।

एंकर से फिनिशर बनने की यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। उन्होंने ताकत पर काम किया, बाउंड्री-हिटिंग सुधारी और गेम की रफ्तार को समझा। बदलाव धीरे-धीरे हुआ, लेकिन स्थायी रहा।

संतुलन

क्रिकेट के साथ पढ़ाई भी जारी रही। संजय कंप्यूटर साइंस में बैचलर डिग्री के अंतिम वर्ष में हैं। अमेरिका में पढ़ाई और क्रिकेट साथ मैनेज करना संभव है, लेकिन आसान नहीं।

ऑनलाइन क्लास, सहयोगी प्रोफेसर और समय प्रबंधन-इन सबके बीच वह दो दुनियाओं को संतुलित कर रहे हैं।

मंच

पिछले दो साल से संजय Major League Cricket में खेल रहे हैं। इस दौरान नेपाल प्रीमियर लीग और ILT20 जैसे टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया।

फिर आया वानखेड़े का वह पल, जब उन्होंने भारत के टॉप गेंदबाज़ों के खिलाफ छक्के लगाए। सोशल मीडिया पर तारीफ हुई, और अनुभवी खिलाड़ियों ने भी उनकी सराहना की।

मानसिकता

संजय की सबसे बड़ी ताकत उनका शांत स्वभाव है। वह कम बोलते हैं, लेकिन मैच के दौरान पूरी तरह वर्तमान में रहते हैं।

एक स्कूल मैच में, जब उनकी टीम 80/5 पर थी, तब भी उन्होंने घबराहट नहीं दिखाई। गेंद से कसी हुई स्पेल और बल्ले से जिम्मेदार पारी खेलकर मैच पलट दिया।

आदर्श

संजय को AB de Villiers पसंद हैं। नकल करने के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए कि खेल को नए तरीके से कैसे खेला जा सकता है।

उनकी परवरिश में भी यही संदेश रहा-संख्याओं से ज्यादा व्यक्तित्व मायने रखता है। शायद इसलिए वह शोर से दूर, काम से पहचान बनाना चाहते हैं।

आज

अमेरिका में क्रिकेट अभी भी बढ़ रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है, लेकिन अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। बे एरिया में अकादमियाँ और वीकेंड लीग एक उभरते इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।

संजय ने समझ लिया है कि खेल की मांग बदलती रहती है। अगर आगे बढ़ना है, तो खुद को बदलना होगा।

वानखेड़े की तालियाँ कुछ पलों की थीं। असली परीक्षा अगली गेंद है। कभी एक बच्चे ने एमएस धोनी का छक्का देखकर सपना देखा था। आज वही बच्चा अपने शॉट्स से किसी और को सपना दे रहा है।

क्रिकेट में असली क्रांति शोर से नहीं, निरंतरता और अनुकूलन से आती है। और संजय की कहानी यही सिखाती है-हर पल में मौजूद रहो, क्योंकि अगला पल ही भविष्य बनाता है।

FAQs

संजय किस डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं?

कंप्यूटर साइंस में बैचलर।

वे किस लीग में खेल चुके हैं?

MLC, NPL और ILT20।

उनके आदर्श खिलाड़ी कौन हैं?

एबी डिविलियर्स।

परिवार कब अमेरिका गया?

मार्च 2020 में।

संजय की भूमिका क्या थी पहले?

एंकर बल्लेबाज़।

Ehtesham Aarif

Ehtesham Arif is a cricket content writer at SportsJagran.com with over 2 years of experience. He specializes in match previews, player analysis, and tournament coverage. His deep interest in the game reflects in his accurate and engaging reporting.

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