क्रिकेट की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन खेल की जड़ों को मज़बूत करते हैं। यासिर अराफ़ात ऐसे ही एक क्रिकेटिंग मुसाफ़िर हैं। खिलाड़ी के तौर पर भी और अब कोच के रूप में भी, उनका सफ़र एक देश या एक टीम तक सीमित नहीं रहा।
महज़ एक महीने पहले उन्हें UAE राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया है, जो T20 वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेने जा रही है। 43 साल की उम्र में यह उनके करियर की एक नई पारी है, लेकिन सोच वही पुरानी है-सीखना और सिखाना।
सफ़र
2016 में संन्यास के बाद अराफ़ात ने कोचिंग को पूरी तरह अपनाया। उन्होंने ECB का लेवल-4 कोचिंग प्रोग्राम पूरा किया और इसके बाद कई अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया।
वह पाकिस्तान टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच रह चुके हैं, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान साउथ अफ्रीका के साथ बॉलिंग कंसल्टेंट की भूमिका निभा चुके हैं और Surrey, Sussex व Perth Scorchers जैसी टीमों के साथ भी काम कर चुके हैं। आज भी वह लंदन के Eton College में युवा खिलाड़ियों को ट्रेन कर रहे हैं।
खिलाड़ी
अराफ़ात का इंटरनेशनल करियर आंकड़ों में भले छोटा दिखे-3 टेस्ट, 11 वनडे और 13 T20I-लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका कद काफी बड़ा रहा। उन्होंने 207 फर्स्ट-क्लास मैच खेले और करीब दो दशकों तक लगातार क्रिकेट खेला।
वह 2009 T20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पाकिस्तान टीम का भी हिस्सा रहे, जिसकी कप्तानी यूनिस ख़ान ने की थी। उसी दौर ने उन्हें छोटे फॉर्मेट की बारीकियां समझने में मदद की।
T20 की समझ
1,500 से ज़्यादा विकेट लेने वाले अराफ़ात मानते हैं कि आज के T20 क्रिकेट में कोई एक सही लेंथ या एक तय फॉर्मूला नहीं होता।
उनके मुताबिक, यॉर्कर, वाइड यॉर्कर, स्लोअर बाउंसर और वैरायटी ही तेज़ गेंदबाज़ की असली ताकत है। T20 हर दिन बदल रहा है और जो गेंदबाज़ स्मार्ट तरीके से खुद को ढाल लेता है, वही लंबे समय तक टिकता है।
चोट और वर्कलोड
तेज़ गेंदबाज़ों में बढ़ती चोटों को लेकर अराफ़ात काफी व्यावहारिक सोच रखते हैं। उनका मानना है कि साल भर चलने वाला क्रिकेट और T20 जैसे फॉर्मेट शरीर पर ज़्यादा दबाव डालते हैं।
इसी वजह से आज खिलाड़ी फॉर्मेट चुनने लगे हैं। यह कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि करियर को लंबा खींचने की समझदारी है।
IPL का असर
अराफ़ात मानते हैं कि IPL ने क्रिकेट की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। पहले महानता का पैमाना टेस्ट क्रिकेट होता था, लेकिन अब T20 और फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट आर्थिक स्थिरता लेकर आता है।
उनके मुताबिक, रेड-बॉल खिलाड़ी विरासत के पीछे जाते हैं और व्हाइट-बॉल खिलाड़ी अवसर और सुरक्षा के पीछे। आख़िरकार, यह पूरी तरह खिलाड़ी की व्यक्तिगत पसंद है।
UAE मिशन
UAE को T20 वर्ल्ड कप 2026 में आसान ग्रुप नहीं मिला है। उनके सामने अफ़ग़ानिस्तान, न्यूज़ीलैंड, साउथ अफ्रीका और कनाडा जैसी टीमें हैं। इसे ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ कहा जा रहा है, लेकिन अराफ़ात इसे सीखने का मौका मानते हैं।
उनका मानना है कि UAE के पास स्पिन और पेस-दोनों में टैलेंट है। अनुभव भले कम हो, लेकिन हर मैच टीम को बेहतर बनाएगा। उनका फोकस कंडीशंस समझने, साफ़ प्लानिंग और लगातार सीखने पर है।
यासिर अराफ़ात ने क्रिकेट को सिर्फ़ खेल नहीं, एक जीवन-दृष्टि की तरह जिया है। पाकिस्तान से लेकर इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अब UAE तक-वह हर जगह यही संदेश देते हैं कि क्रिकेट में टिके रहना सिर्फ़ टैलेंट से नहीं, समझ और अनुकूलन से होता है।
शायद इसी वजह से वह आज भी ग्लोबल क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद मुसाफ़िरों में गिने जाते हैं।
FAQs
यासिर अराफ़ात वर्तमान में किस टीम के कोच हैं?
वह UAE राष्ट्रीय टीम के बॉलिंग कोच हैं।
अराफ़ात किस T20 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रहे?
2009 T20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पाकिस्तान टीम।
अराफ़ात ने कितने फर्स्ट-क्लास मैच खेले?
उन्होंने 207 फर्स्ट-क्लास मैच खेले।
T20 गेंदबाज़ी पर अराफ़ात की मुख्य सलाह क्या है?
कोई तय लेंथ नहीं, स्मार्ट वैरायटी ही सफलता की कुंजी है।
UAE किस कठिन ग्रुप में है?
अफ़ग़ानिस्तान, न्यूज़ीलैंड, साउथ अफ्रीका और कनाडा के साथ।









